यहाँ कोई नियम नहीं, कोई बंदिश नहीं, बस वही बोलिए जो आपके अन्दर है, क्योंकि आपके अन्दर है भारत कि असली तस्वीर, तो छोडिये बनावटीपन, और आज निकाल डालिए मन कि भड़ास, अपनी रचना भेजने, अपनी बात कहने के लिए हमें मेल करें. editor.bhadohinews@gmail.com
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सोमवार, 25 जुलाई 2011

भ्रूण-हत्या, आधुनिक समाज के माथे पर किसी अजन्मे बच्चे के खून का लगा एक काला टीका.


पर समाज की उस बुरी नज़र का क्या...जो उस अजन्मे बच्चे पर लग चुकी होती हैं, देश के दूर-दराज़ गाँओं में ही नहीं अपितु आज के आधुनिक समाज में या शहरों में भी ये कुकृत्य देखने को मिलता है, और...सबसे ज्यादा भ्रूण-हत्याएं इसलिए की जाती हैं..क्योंकि.....वो भ्रूण एक लड़की का है......
इस तरह से तो प्रकृति नष्ट हो जायेगी,..... जब प्रकृति को पालने वाली...नारी या...माँ ..ही न होगी..... 

शनिवार, 23 जुलाई 2011

१८५७ का पूरा सच

१८५७ का पूरा सच ..... देश में एक गीत बहुत ज्यादा गाया जाता है.... " दे दी हमे आजादी बिना खडग बिना ढाल साबरमती के संत तुने कर दिया कमाल... " अब कोई ये बताये की जिस देश ने १८३० का संथाल, १८३९ का कूका आन्दोलन, १८३८ का भील आन्दोलन, सिख आन्दोलन, नागा साधू आन्दोलन में ४ करोड़ भारतीय शहीद हुए .... उसके बाद देश के इतिहास में महान प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हुए जिसमे १ करोड़ ७० लाख भारतीयों ने मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर किये...... देश में ७ लाख क्रान्तिकारियो जिनमे भगत सिंह, अशफाक उल्लाह खान, बटुकेश्वर दत्त, राजगुरु, सुखदेव, राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद, राजेंदर लाहिरी, जतिन दस, रोशन लाल, भगवती चरण वोहरा, दुर्गा भाभी ने देश की अजादी के लिए प्राण न्योछावर कर दिए.

*** राहुल की राजनीतिक सक्रियता - एस. शंकर ***

राहुल गांधी स्वत: जब भी कुछ महत्वपूर्ण बोलने की कोशिश करते हैं तो गड़बड़ हो जाती है। प्राय: कांग्रेस के रणनीतिकारों को स्पष्टीकरण देने आना पड़ता है। राहुल को सक्रिय राजनीति में आए 13 वर्ष हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में ये अच्छे लक्षण नहीं कि बार-बार उनके बयान पर सफाई देनी पड़े। 'एक प्रतिशत' आतंकी घटनाओं
के न रुक सकने वाला नवीनतम कथन भी वैसा ही साबित हुआ। दो महीने पहले भच4�र्ष हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में ये अच्छे लक्षण नहीं क�6 में असत्य साबित हुए। इससे पहले राहुल प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को एक जैसा बता चुके हैं। ऐसे बयानों से कांग्रेस को कुछ चुनावी लाभ भले मिले, किंतु देश का हित नहीं हो रहा। शत्रु और मित्र के प्रति ऐसी समदर्शिता से आतंकवाद विरोधी लड़ाई कमजोर ही हुई है।

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

आज का भारत वर्ष !


जब आंतरिक मामले हों कमजोर
और हास्यास्पद हो विदेश नीति
अनुशाशन शुचिता क़ानून प्रबंधन
शून्य हों राजनैतिक इच्छाशक्ति 

भ्रष्टाचार के नशे में धुत गाड़ीवान
जब हम बैलों के ऊपर बोझ लादे
जबरन पिलाए रोज दूषित पानी
और शाम बारूद के उपर खूंटे बांधे 

इसे आजादी का चरमोत्कर्ष कहिये
विशाल लोकतंत्र भारत वर्ष कहिये !!
 - सुलभ

 http://sulabhpatra.blogspot.com/
--
Sulabh Jaiswal
Skype: IT.EXPERT

वैष्णव जन तो तेने कहिये - शम्भु चौधरी

कानून के इस अंधेपन, गूंगापन और नंगेपन को यदि देखना हो तो वह भारत के किसी भी हिस्से में जाकर देख सकते हैं। इस देश में पहले कुछ विदेशी भ्रमणकारी भारतीयों की गरीब बस्तियों में जाकर रहते उसका अध्ययन करते और भारत की दरिद्रता व नग्नता को एक अच्छा सा नाम जैसे ‘‘सिटी ऑफ जॉय’’ देकर अपना माल हमें ही बेचने में सफल हो जाते और हम भारतीय इस बात पर गर्व महसूस करते हैं कि "Kolkata is City of Joy" यह न सिर्फ हमारी खोखली मानसिकता को दर्शाती है।

जय हिंद, वन्देमातरम...

सोनिया जिसकी मम्मी है, वो सरकार (कोंग्रेस) निकम्मी है.

आडवानी जिसका ताऊ है, वो विपक्ष (भाजपा) बिकाऊ है.

बाकि कुछ (सपा, बसपा) मस्त है, पक्ष बदलने में लिप्त है.
...
बचे खुचे नाकाबिल (लालू आदि) है, इन्हें कुछ नहीं हासिल है.

देश को बचाना है, तो अब खुद ही आगे आना होगा.

अपने घरो के सुकून को छोड़ सड़को पे उतरना होगा.

ये हालत अब बदलो देश की, भगत सिंह तो हो पर पडोसी के घर में

अब हम खुद बन जाये भगत सिंह, देश हित में मरना कबूल हो

ऐ वतन, ऐ वतन!!!!! हमको तेरी कसम तेरी राहों पे जान अपनी लुटा जायेंगे.

फूल क्या चीज है भेंट अपने सिरों की चढ़ा जायेंगे.
जय हिंद, वन्देमातरम. वन्देमातरम.


यह हमें उदय पालजी ने ईमेल से भेजा है.

शनिवार, 2 जुलाई 2011

सिंहासन खाली करवाने की बारी है

वर्तमान समय में हमारा भारत देश किन हालातो से गुजर रहा है .सब वाकिफ हैं |एक तरफ जहाँ इसी देश में भोजन करते समय न जाने कितनी बार यह सोचना पड़ता है कि कौनसी
डिश (खाना ) खाया जाये |तो दूसरी तरफ आधे से भी ज्यादा आबादी जिसको दो वक्त का खाना नहीं मिल पाता है ..और कुछ को मिल जाता है तो भरपेट नहीं मिल पाता है |
खैर जो भी हालात है बहुत ही चिंता जनक हैं और दुःख और तकलीफों से भरे हैं |और बढती महंगाई और टैक्स में यह तकलीफ आग में घी डालने का काम करती है |आज भारत का आम आदमी इस सरकारी तंत्र कि व्यवस्था से त्रस्त है |जरूरत कि चीजों के पैसे बढाकर ..उसे बार यही तर्क दिया जाता है कि सरकारी घाटे कि भरपाई के लिय ऐसा किया गया है | सरकारे किस प्रकार आम आदमी कि जेब से पैसा निकलती हैं | इसका बहुत से लोगो को पता है परन्तु बहुत सा वर्ग ऐसा है जो जानते हुए भी अनजान है | तो आइये पह्ले यही जान लेते हैं कि आम आदमी से कितना पैसा वसूला जा रहा है |

कुछ उदाहरणों से समझते हैं ----
आपको अपने ओफिस में है आपको लंच करना है और आप घर से खाना नहीं लाए तो आप कहाँ करेंगे ?
उत्तर - जाहिर सी बात है किसी होटल या रेस्तरां में ?
ध्यान देना आपको यहाँ फ़ूड टैक्स चुकाना पड़ता है |

आप कोई सर्विस लेते हैं या देते है तो आपको सर्विक्स टैक्स चुकाना पड़ता है |
यदि आप घर खरीदते है तो आपको स्टाम्प ड्यूटी व् रजिस्ट्रेशन टैक्स देना पड़ता है |
आप आपनी गाड़ी या फिर अन्य कोई साधन से यात्रा करते हैं तो आपको यात्रा टैक्स व् सड़क टैक्स देना पड़ता है

इसके अलावा अगर आप व्यापार करते है तो और जानिय
आपको प्रोफेसनल टैक्स देना पड़ेगा
यदि आप जिस भी चीज को अपने राज्य से बाहर भेज रहे हैं तो आपको सेंट्रल टैक्स , कस्टम ड्यूटी टैक्स आदि देना होगा
यदि आपको अपने व्यापार में मुनाफा होता है तो आपको इनकम टैक्स देना होगा
आप अपनी फेक्ट्री में चीजे Manufeture करते हैं तो आपको एक्साइज ड्यूटी टैक्स चुकाना पड़ेगा
यही आपको छोड़ नहीं दिया जाता .....
यदि आपका व्यापार मिलियन में है तो इसके लिय आपको टर्नओवर टैक्स और न्यूनतम अल्टरनेटिव टैक्स चुकाना होगा |
इसके अलावा भी बहुत सारे ऐसे अवसर जहाँ पर हम सबकी जेब पर वार किया जाता है |

माना कि अर्थव्यवथा में कुछ टैक्सेज जरुरी हैं ...लेकिन ये कहाँ कि अर्थ व्येव्स्था है जहाँ के नागरिको कि खून पसीने कि कमाई को चोरी करके विदेशी बैंको में जमा किया जाता है और वहाँ नागरिक मात्र 20 रूपये पर आपनी जिंदगी गुजारने को मजबूर हो जाएँ ?
यहाँ पर यह भी जान लेना जरुरी है कि भारत का जो लगभग 400 लाख करोड रुपया काले धन के रूप में विदेशी बैंको में जमा है |वो यदि भारत कि अर्थ व्यवस्था में लगा दिया जाता है तो भारत में आने वाले 50 सालों तक कोई टैक्स कि जरूरत नहीं पड़ेगी | भारत से गरीबी एक दिन में मिटाई जा सकती है | भारत का प्रत्येक नागरिक चाहता है कि वो पैसा वापस आना चाहिय फिर सरकार उसको क्यों नहीं ला रही है ? इसका मतलब साफ़ है कि सरकार खुद चोर व भ्रष्ट है |
क्यों भारतवासी कि गाढ़ी कमाई को सरकार रोज रोज डीजल ,पेट्रोल कि कीमते बढाकर लुट रही है |?तर्क यह दिया जाता है तेल कंपनियों को घाटा हो रहा है |अगर उनको घाटा हो रहा है तो सरकार उस पैसे का उपयोग क्यों नहीं करती ,जो विदेशी बैंको में जमा है और काला धन है |
देश वासियों समय आ गया है |63 सालो में इन्होने बहुत लूट लिया है |अब और नहीं |खुद जाग जाओ नहीं तो वो दिन भी अब दूर नहीं जब आप सभी से आपकी सारी कमाई लुट ली जायेगी |अत : आब इनसे उमीद करना छोड़ दो और इन सभी को अपनी वोट कि ताकत से परास्त कर दो |आपके पास एक मात्र संवैधानिक अधिकार वोट का है | अब व्यवस्था परिवर्तन कि नितांत जरूरत है | क्योकि इनको देखा जा चूका है |
63 सालो में ही जब ये कुछ नहीं कर पाए तो अब क्या करेंगे ? जितना लुटा है उसको वापस लाना है और आगे से न लुटें इसके लिय भी प्रतिबद्ध होना जरुरी है | अगर आज हम नहीं जागे तो भविष्य के जिमेद्दार हम ही होंगे |इनको कोई फर्क नहीं पड़ता क्योकि ये कुछ भी कानून बना सकते है |और आम आदमी को लूट रहे हैं | बहुत से लोग ये सोचते हैं हमें फर्क नहीं पड़ता क्योकि हमें दो वक्त का खाना मिल रहा है ..लेकिन उनसे अनुरोध है कि आप आपनी कमाई का हिसाब लगाइए कि आप कितना कमाते है और कितना सरकार हर कदम पर आप से वसूल करती है | आपकी छोटी सी उदासीनता इस देश को गर्क की और ले जा सकती है और आपके छोटे से प्रयास से खुशहाली कि ओर अब फैसला आपके हाथ है ...अगर आज भी नहीं जागे तो फिर कुछ ही दिनों बाद कीमते फिर बढ़ा दी जायेंगी और वो ही रोना धोना .शुरू हो जाएगा ..कुछ होने वाला नहीं है .|तो देर करना गलत होगा |


तरुण भारतीय द्वारा प्रेषित
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