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गुरुवार, 21 जुलाई 2011

जय हिंद, वन्देमातरम...

सोनिया जिसकी मम्मी है, वो सरकार (कोंग्रेस) निकम्मी है.

आडवानी जिसका ताऊ है, वो विपक्ष (भाजपा) बिकाऊ है.

बाकि कुछ (सपा, बसपा) मस्त है, पक्ष बदलने में लिप्त है.
...
बचे खुचे नाकाबिल (लालू आदि) है, इन्हें कुछ नहीं हासिल है.

देश को बचाना है, तो अब खुद ही आगे आना होगा.

अपने घरो के सुकून को छोड़ सड़को पे उतरना होगा.

ये हालत अब बदलो देश की, भगत सिंह तो हो पर पडोसी के घर में

अब हम खुद बन जाये भगत सिंह, देश हित में मरना कबूल हो

ऐ वतन, ऐ वतन!!!!! हमको तेरी कसम तेरी राहों पे जान अपनी लुटा जायेंगे.

फूल क्या चीज है भेंट अपने सिरों की चढ़ा जायेंगे.
जय हिंद, वन्देमातरम. वन्देमातरम.


यह हमें उदय पालजी ने ईमेल से भेजा है.

5 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

जब बैठेगी देश में ऐसी सरकार
तो सहने होंगे उसे ऐसे ही वार
जैसे को तैसे कहने की नीति बहुत पुरानी है
अब तो हमको ऐसी बाते ही आगे बढ़ानी हैं.
बहुत अच्छा प्रयास किया है उदय पाल सिंह जी ने बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

वाह क्या जमकर कोसा है!
सटीक रचना!

शिखा कौशिक ने कहा…

बहुत खूब .आभार

JAGDISH BALI ने कहा…

Simply Great .

कविता रावत ने कहा…

ये हालत अब बदलो देश की, भगत सिंह तो हो पर पडोसी के घर में

अब हम खुद बन जाये भगत सिंह, देश हित में मरना कबूल हो
..bahut badiya ..

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